श्मशान में 'कागजी' विकास: बिना नदी-नाले के बना डाला लाखों का स्टॉप डैम, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सरकारी राशि
बरघाट (लालपुर)। जनपद पंचायत बरघाट के अंतर्गत ग्राम पंचायत लालपुर में भ्रष्टाचार का एक ऐसा नमूना सामने आया है, जिसे देखकर व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। यहाँ प्रशासन और पंचायत की मिलीभगत से एक ऐसे स्थान पर 'स्टॉप डैम' का निर्माण कर दिया गया है, जहाँ न कोई नदी है और न ही कोई नाला। श्मशान घाट की भूमि पर बना यह डैम आज अपनी बदहाली और भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रहा है।
सूखे खेत में 'जल संरक्षण' का खेल
ग्राउंड रिपोर्ट और प्राप्त फुटेज के अनुसार, यह स्टॉप डैम मुख्य मार्ग के किनारे श्मशान भूमि पर बनाया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे क्षेत्र में पानी की आवक-जावक का कोई स्रोत मौजूद नहीं है। जहाँ एक बूंद पानी नहीं रुकता, वहाँ लाखों रुपये की लागत से चेक डैम खड़ा कर देना समझ से परे है। मौके पर सिर्फ किसानों के खेत नजर आते हैं, किसी जलधारा का नामोनिशान तक नहीं है।
गुणवत्ता विहीन निर्माण और बंदरबांट का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि इस स्टॉप डैम के नाम पर शासन की राशि का खुला बंदरबांट किया गया है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता इतनी घटिया है कि यह पहली नजर में ही भ्रष्टाचार का प्रतीक नजर आता है। लाखों की स्वीकृति के बावजूद मौके पर नाममात्र का काम हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि केवल कागजों पर खानापूर्ति करने और कमीशन का लाभ लेने के लिए इस अनुपयोगी संरचना को खड़ा कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु जो खड़े करते हैं सवाल:
* स्थान समसान भूमि में रोड किनारे: बिना किसी नदी या नाले के श्मशान घाट की सूखी जमीन पर डैम क्यों बनाया गया?
* प्रशासनिक अनदेखी: तकनीकी स्वीकृति देने वाले इंजीनियर और अधिकारियों ने क्या मौके का मुआयना नहीं किया?
* जनहित की अनदेखी: जनता के टैक्स के पैसे को जनहित के बजाय भ्रष्टाचारियों की जेब भरने में क्यों इस्तेमाल किया गया?
जवाबदेही से बचते जिम्मेदार
इस मामले में छोटे कर्मचारियों से लेकर उच्चाधिकारियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। बिना ऊपरी संरक्षण के ऐसे 'अदृश्य' प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलना नामुमकिन है। यह सीधा-सीधा शासन और जनता की धनराशि की लूट है।
क्षेत्रीय जनता अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग कर रही है। देखना होगा कि प्रशासन इस स्पष्ट भ्रष्टाचार पर क्या रुख अपनाता है या फिर 'कमीशन की मलाई' के आगे जनता की आवाज को दबा दिया जाएगा।
