खेतों पर "बदली और कोहरे" का ग्रहण: बर्बादी की कगार पर रबी की फसले, किसानों की बढ़ी चिंता


 

[बरघाट], [4/1/2026] – पिछले 2/4दिनों से मौसम के बदले मिजाज ने अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। आसमान में छाई काली बदली और घने कोहरे के कारण रबी की फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई या मौसम साफ नहीं हुआ, तो गेहूं, चना, मसूर, तिवड़ा और लखोरी जैसी दलहनी और तिलहनी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं।

फसलों के लिए क्यों 'काल' है यह मौसम?

कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों के अनुसार, इस समय पड़ने वाला घना कोहरा फसलों के लिए धीमे जहर की तरह काम कर रहा है। कोहरे की वजह से फसलों में 'मुंढरा' (कीट और फफूंद रोग) लगने का सबसे ज्यादा खतरा होता है।

 * तिवड़ा और लखोरी: इन फसलों में फूल आने के समय कोहरा और बदली लगने से फूल झड़ने लगते हैं और फलियां नहीं बन पातीं।

 * चना और मसूर: नमी अधिक होने से इनमें 'उकठा' रोग और इल्लियों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है।

 * गेहूं: प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया बाधित होने से पौधों की बढ़वार रुक जाती है।

'पानी नहीं गिरा तो डूब जाएगी लागत'

क्षेत्र के किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने खाद, बीज और जुताई में भारी निवेश किया है। अब जब फसलें खड़ी हैं, तब मौसम की मार पड़ रही है। किसानों का मानना है कि यदि इस समय तेज बारिश हो जाए, तो कोहरे और बदली का असर धुल जाएगा और फसलों को नई जान मिलेगी। लेकिन यदि कोहरा इसी तरह बना रहा, तो फसलें "मुंढरा" जाएंगी, जिससे पैदावार शून्य हो जाएगी और लागत निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।

क्या कहते हैं जानकार?

जानकारों का कहना है कि बदली वाले मौसम में सूरज की रोशनी नहीं मिलने से खेतों में फंगस का संक्रमण तेजी से फैलता है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी फसलों की कड़ी निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर कीटनाशकों का छिड़काव करें।

फिलहाल, किसान टकटकी लगाए आसमान की ओर देख रहे हैं कि कब इंद्रदेव मेहरबान हों और उनकी मेहनत की कमाई को इस धुंध से छुटकारा मिले।

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