पारम्परिक रीति -रिवाजों के साथ संपन्न हुआ जवारे विसर्जन!

 


भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ जवारे विसर्जन कार्यक्रम

 धार्मिक श्रद्धा और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। 


चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जवारे विसर्जन का कार्यक्रम पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।


गाजे-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा


विसर्जन की शुरुआत घर से पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं द्वारा सिर पर जवारे रखकर शोभायात्रा निकाली गई। रास्ते भर भक्त माता के भजनों पर थिरकते और जयकारे लगाते हुए विसर्जन स्थल तक पहुंचे। ढोल-ताशों और भक्ति गीतों की गूंज ने पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया।

श्रद्धा का प्रतीक हैं जवारे


मान्यता के अनुसार, बोए गए जवारे सुख-समृद्धि और हरियाली का प्रतीक माने जाते हैं। नौ दिनों की कठिन साधना और सेवा के बाद, आज इन्हें पूरे सम्मान के साथ विसर्जन स्थल पर ले जाकर विसर्जित किया गया। इस दौरान परिवार के सभी सदस्य और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
> "भक्ति और संगीत के संगम के साथ निकला यह कारवां आस्था की एक अनूठी मिसाल रहा, जहाँ हर कोई माता की भक्ति में सराबोर नजर आया।"
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