सिवनी -बालाघाट रोड:कब तक "मौत का सफर"तय करेंगे राहगीर? जर्जर शोल्डर और गड्ढे दे रहे हादसों को दावत!

सिवनी-बालाघाट रोड: कब तक 'मौत का सफर' तय करेंगे राहगीर? जर्जर शोल्डर और गड्ढे दे रहे हादसों को दावत!

सिवनी/बालाघाट: क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली सिवनी-बालाघाट मुख्य सड़क इन दिनों यात्रियों के लिए काल का पर्याय बन चुकी है। आलम यह है कि इस मार्ग को अब स्थानीय स्तर पर 'मौत की रोड' के नाम से पुकारा जाने लगा है। सड़क की बदहाली और प्रशासन की अनदेखी ने राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है।

प्रमुख समस्याएँ जो बन रही हैं दुर्घटना का कारण:

 * अधूरे साइड शोल्डर: सड़क के किनारों (शोल्डर्स) पर वर्षों से मुरूम या फिलिंग नहीं की गई है। सड़क और कच्ची जमीन के बीच गहरा अंतर होने के कारण, यदि कोई वाहन सामने से आ रहे वाहन को रास्ता देने के लिए नीचे उतरता है, तो वह अनियंत्रित होकर पलट जाता है।

 * जानलेवा गड्ढे: सड़क पर जगह-जगह उभरे गड्ढे दोपहिया वाहनों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। रात के अंधेरे में ये गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं।

 * बढ़ते हादसे: स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर दुर्घटनाएं अब रोज की बात हो गई हैं। कई परिवारों ने इस सड़क की लापरवाही के कारण अपनों को खोया है।

जनता की मांग:

क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) से मांग की है कि:

 * तुरंत प्रभाव से सड़क के साइड शोल्डर्स को भरा जाए।

 * पैच वर्क के नाम पर खानापूर्ति करने के बजाय गुणवत्तापूर्ण मरम्मत की जाए।

 * दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सांकेतिक बोर्ड और रेडियम लगाए जाएं।

> "क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? वर्षों से इस रोड की हालत जस की तस बनी हुई है। टैक्स देने के बाद भी हमें सुरक्षित सड़क नहीं मिल पा रही है।" > — एक व्यथित स्थानीय नागरिक

निष्कर्ष: सिवनी-बालाघाट मार्ग का सुधारीकरण केवल एक मांग नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन की सुरक्षा का सवाल है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह 'मौत की रोड' का कलंक और गहरा होता जाएगा।
 

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