बैंक या परेशानी का केंद्र? गंगेरूआ सहकारी बैंक में किसानों की बढ़ी मुश्किलें, इलाज के लिए भी तरस रहे लोग
बरघाट (सिवनी): जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित सिवनी की शाखा गंगेरूआ इन दिनों अपनी मनमानी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। बैंक प्रबंधन द्वारा बनाए गए अजीबोगरीब नियमों के कारण क्षेत्र के किसान और आम ग्राहक बेहद परेशान हैं। आलम यह है कि बैंक ने कैश निकासी और जमा के लिए केवल 2 घंटे (सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक) का समय निर्धारित कर दिया है, जिससे दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
क्या है पूरा मामला?
बैंक परिसर में चस्पा किए गए एक नोटिस के अनुसार, विड्रॉल फॉर्म केवल दोपहर 1:00 बजे तक ही स्वीकार किए जा रहे हैं। इसके बाद आने वाले ग्राहकों को सीधे तौर पर मना कर दिया जाता है। पिछले 3-4 दिनों से किसान बैंक के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सीमित समय और स्टाफ की कमचोरी के कारण उनका काम नहीं हो पा रहा है।
इलाज के लिए भी नहीं मिल रहे अपने ही पैसे
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी के घर में मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या किसी को गंभीर बीमारी के इलाज के लिए तुरंत पैसों की जरूरत हो, तो बैंक के इन नियमों के कारण मरीज की जान पर बन सकती है। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा, "अगर समय पर इलाज के लिए पैसे नहीं मिले और कोई अनहोनी हो गई, तो क्या बैंक प्रबंधन इसकी जिम्मेदारी लेगा?"
मुख्य समस्याएं:
* समय की पाबंदी: बैंकिंग नियमों के विपरीत केवल 2 घंटे ही लेनदेन की खिड़की खुली रखना।
* किसानों की परेशानी: रबी सीजन और अन्य जरूरतों के बीच किसानों को दिन भर धूप में खड़े रहने के बाद मायूस लौटना पड़ रहा है।
* अमानवीय व्यवहार: गंभीर रूप से बीमार या बुजुर्गों के लिए कोई विशेष व्यवस्था न होना।
जिम्मेदारों की चुप्पी
जहाँ एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया और सुलभ बैंकिंग का दावा करती है, वहीं गंगेरूआ शाखा की यह तस्वीर दावों की पोल खोल रही है। क्या उच्च अधिकारियों को इस अव्यवस्था की जानकारी है? या फिर जानबूझकर किसानों को "पगलाया" जा रहा है?
क्षेत्र की जनता की मांग है कि बैंक के समय को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाए और पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था कर बैंकिंग सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित किया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
