बरघाट के लिए वरदान बना 'मंडी कांचना जलाशय': प्यास भी बुझ रही और पर्यटन को भी मिल रहे नए पंख
बरघाट (सिवनी): बरघाट नगर और आसपास के ग्रामीण अंचलों के लिए मंडी कांचना जलाशय केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र की खुशहाली की जीवनरेखा बन गया है। जल संकट के समाधान से लेकर रोजगार के नए अवसरों तक, यह जलाशय और इससे सटी पहाड़ियां अब विकास की एक नई कहानी कह रही हैं।
एक जलाशय, अनेक लाभ
मंडी कांचना जलाशय ने स्थानीय स्तर पर आर्थिक और सामाजिक बदलाव की नींव रखी है:
* नगर की प्यास बुझी: वर्षों से पेयजल की किल्लत झेल रहे बरघाट नगर के लिए यह जलाशय मुख्य सहारा बना है। पाइपलाइन और सुचारू जल प्रदाय से नगरवासियों को बड़ी राहत मिली है।
* किसानों की मुस्कान: जलाशय के पानी से आसपास के खेतों की सिंचाई होने से फसलों की पैदावार बढ़ी है, जिससे क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
* मछुआरा समुदाय को सहारा: स्थानीय मछुआरों के लिए यह जलाशय आजीविका का स्थायी केंद्र बन गया है, जिससे कई परिवारों का पालन-पोषण हो रहा है।
इको-पर्यटन का नया केंद्र: 'नगर वन'
जलाशय के समीप स्थित पहाड़ी क्षेत्र, जो कि वन विभाग के अंतर्गत आता है, अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण चर्चा में है। वन विभाग द्वारा इसे 'नगर वन इको-पर्यटन क्षेत्र' के रूप में विकसित किए जाने की योजना से बरघाट की पहचान एक पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगी।
> "जलाशय की नीली चादर और पहाड़ियों की हरियाली का संगम इस जगह को किसी हिल स्टेशन जैसा एहसास देता है। यह स्थान न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए मनोरंजन का भी प्रमुख केंद्र बनेगा।"
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क्या होगा खास?
* प्राकृतिक वातावरण: पहाड़ी क्षेत्र को 'नगर वन' के रूप में संरक्षित करने से जैव-विविधता बढ़ेगी।
* पर्यटन को बढ़ावा: ट्रेकिंग, नेचर वॉक और शांति के पल बिताने के लिए यह बेहतरीन जगह साबित होगी।
* रोजगार सृजन: इको-पर्यटन के विकसित होने से गाइड, छोटे दुकानदारों और स्थानीय युवाओं को काम के नए अवसर मिलेंगे।
निष्कर्ष:
बरघाट का यह क्षेत्र अब प्रकृति और प्रगति का अद्भुत उदाहरण पेश कर रहा है। जल संरक्षण और पर्यटन के इस मेल ने बरघाट को एक नई चमक दी है।