श्मशान घाट की भूमि पर अतिक्रमण: फसल के बीच गड्ढा खोदकर करना पड़ा शव का अंतिम संस्कार
धोबीसर्रा। (कुरई )ग्राम पंचायत धोबीसर्रा के समान घाट से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ सार्वजनिक मरघटी (श्मशान घाट) की भूमि पर लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर फसल उगाने का मामला उजागर हुआ है। अतिक्रमण की इस स्थिति के कारण समाज को एक मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए पानी और फसलों से घिरे खेत के बीच गड्ढा खोदने पर मजबूर होना पड़ा।
मिली जानकारी के अनुसार, गाँव के ढीमर (केवट/मांझी) समाज के निवासी **श्री महतलाल रत्नपुरे** का निधन हो गया था। जब परिजन और समाज के लोग अंतिम संस्कार के लिए तय की गई मरघटी की भूमि पर पहुँचे, तो वहाँ का नजारा देख दंग रह गए। श्मशान की भूमि पर चारों तरफ धान की परहा (फसल) लगी हुई थी और पानी भरा हुआ था। मजबूरी में समाज के लोगों को फसल के बीच ही गड्ढा खोदकर शव को दफनाना पड़ा।
वर्षों पुरानी मरघटी पर कब्जे का आरोप
इस संबंध में जब उपस्थित ग्रामीणों और परिजनों से बात की गई, तो उन्होंने गहरी नाराजगी और दुख व्यक्त किया। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया:
*"यह हमारे मांझी समाज की वर्षों पुरानी पारंपरिक मरघटी है। हम पीढ़ियों से अपने समाज के लोगों के अंतिम संस्कार के लिए इसी जगह पर आते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से स्थानीय लोगों ने इस भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और यहाँ खेती करना शुरू कर दिया है।"*
इस संबंध में बात चीत करने स्थानीय सरपंच सचिव से सम्पर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हुआ
प्रशासन के ध्यान देने की जरूरत
धार्मिक और सामाजिक रीति-रिवाजों के लिए सुरक्षित रखी गई सरकारी व सार्वजनिक भूमियों पर इस तरह का अतिक्रमण न केवल एक कानूनन अपराध है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी ठेस पहुँचाने वाला है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और स्थानीय पंचायत से गुहार लगाई है कि इस मरघटी की भूमि का तत्काल सीमांकन (नापजोख) कराया जाए, अतिक्रमणकारियों को बेदखल किया जाए और समाज को उनकी पारंपरिक अंतिम संस्कार की जगह सुरक्षित वापस दिलाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा निर्मित न हो।