## **भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा विकास? कागजों में 'रपटा', जमीन पर सिर्फ 'फर्श'**
**सिवनी (मध्य प्रदेश):** दक्षिण सिवनी वन मंडल के अंतर्गत **कुरई** क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के सदुपयोग पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इस तस्वीर ने विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
तस्वीर में साफ़ देखा जा सकता है कि **'गोरझरना नाला'** पर जिस रपटे के निर्माण का दावा किया गया है, वह जमीन के स्तर से पूरी तरह चिपका हुआ है। तकनीकी रूप से रपटा (Causeway) इसलिए बनाया जाता है ताकि बारिश के दिनों में नाले का पानी नीचे से निकल सके और ऊपर से आवागमन बाधित न हो। लेकिन यहाँ स्थिति इसके उलट है; यह निर्माण किसी पुलिया या रपटे जैसा न लगकर महज जमीन पर बिछाई गई कंक्रीट की एक परत जैसा नजर आ रहा है।
### **लाखों की लागत, पर लाभ क्या?**
सूचना बोर्ड के अनुसार, इस कार्य के लिए **6,43,000 रुपये** की राशि स्वीकृत की गई थी, जिसमें से **6,42,877 रुपये** खर्च भी कर दिए गए हैं।
* **कार्य का नाम:** रपटा निर्माण कार्य (गोरझरना नाला)
* **क्षेत्र:** कक्ष क्रमांक RF 296
* **फंड:** तेन्दूपत्ता अधोसंरचना विकास मद
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि अगर नाले में थोड़ा भी पानी आता है, तो यह तथाकथित रपटा पूरी तरह डूब जाएगा, जिससे राहगीरों को कोई राहत नहीं मिलेगी। सवाल यह उठता है कि क्या 6.42 लाख रुपये की लागत से बना यह 'ग्राउंड लेवल' निर्माण वाकई तकनीकी मानकों पर खरा उतरता है या यह केवल बजट खपाने की एक औपचारिकता है?
### **जांच की दरकार**
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस निर्माण की गुणवत्ता और इसकी उपयोगिता की जांच करनी चाहिए। क्या वाकई इतने ऊंचे बजट में केवल जमीन से चिपका हुआ फर्श ही बनाया जाना था? जनता के टैक्स के पैसे का इस तरह का 'विकास' चर्चा का विषय बना हुआ है।
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