4 महीने से वेतन का इंतज़ार: उपयंत्री की भूख या सिस्टम की बेरुखी? * #JusticeForSubEngineers * #PendingSalary * #EmployeeRights


 विशेष कवरेज: सिस्टम की 'इंजीनियरिंग' फेल, सिवनी के उप-यंत्री दाने-दाने को मोहताज

सिवनी। "साहब! फाइलें तो हम समय पर आगे बढ़ा देते हैं, लेकिन हमारे घर के चूल्हे की फाइल चार महीने से दफ्तरों में अटकी है।" यह व्यथा सिवनी जिले के उन उप-यंत्रियों (Sub-Engineers) की है, जो पिछले 120 दिनों से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। विशेषकर बरघाट जनपद में स्थिति बदतर हो चुकी है, जहाँ विकास के पहिए को गति देने वाले हाथ आज खुद तंगहाली में हाथ फैलाने को मजबूर हैं।

दबाव में 'काम', अभाव में 'नाम'

एक तरफ सरकार 'शत-प्रतिशत' लक्ष्य पूरा करने का दबाव डालती है, वहीं दूसरी ओर इन कर्मचारियों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। बरघाट जनपद के एक उप-यंत्री ने अपनी व्यथा सुनाते हुए शासन की संवेदनहीनता की पोल खोल दी:

> "घर में बीमार पिता की दवाइयां खत्म हो रही हैं, छोटे बच्चों की स्कूल फीस का नोटिस आ रहा है, और भाई के इलाज के लिए उधार तक मिलना बंद हो गया है। हम दिन-रात फील्ड पर पसीना बहाते हैं, पर क्या शासन को यह नहीं दिखता कि हम भी इंसान हैं? क्या अधिकारियों को हमारी भूख और हमारी मजबूरियां दिखाई नहीं देतीं?"

सिस्टम पर कड़े सवाल:

 * वेतन नहीं तो काम क्यों? - जब शासन 4 महीने से वेतन नहीं दे पा रहा, तो किस नैतिक अधिकार से कर्मचारियों पर काम का दबाव बनाया जा रहा है?

 * बीमारी और बदहाली का जिम्मेदार कौन? - यदि किसी उप-यंत्री के परिवार में इलाज के अभाव में कोई अनहोनी होती है, तो क्या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेगा?

 * कहाँ अटक रहा है बजट? - क्या यह बजट की कमी है या फिर प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही, जिसके कारण फाइलों में वेतन दबा हुआ है?

ग्राउंड जीरो की हकीकत

| समस्या | प्रभाव |

|---|---|

| आर्थिक बोझ | बाजार से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने को मजबूर। |

| मानसिक तनाव | काम के प्रेशर और खाली जेब के कारण डिप्रेशन की स्थिति। |

| पारिवारिक संकट | बीमार परिजनों का इलाज और बच्चों की शिक्षा प्रभावित। |

निष्कर्ष: जागिए सरकार!

यह केवल एक विभाग की समस्या नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट है। विकास कार्यों का दम भरने वाली सरकार अगर अपने ही तकनीकी स्तंभों को वेतन नहीं दे सकती, तो 'सुशासन' का दावा खोखला है। जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को चाहिए कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर 'वेतन भुगतान' सुनिश्चित करें, वरना कर्मचारी काम बंद करने जैसा बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे। बने रहे आगामी समाचार डीडी इंडिया न्यूज़ के साथ 

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