स्थान: बरघाट, मध्य प्रदेश
विषय: शहर को स्वच्छ रखने वाले सफाई कर्मियों के संघर्ष और समर्पण पर एक विशेष नजर।
1. सूरज उगने से पहले शुरू होता है सफर
जब पूरा बरघाट गहरी नींद में होता है और सुबह की ठंड अपनी चरम पर होती है, तब ये सफाई कर्मी अपने घरों से निकल पड़ते हैं। सुबह के 5:00 या 6:00 बजे से ही सड़कों पर झाड़ू की 'सरसराहट' सुनाई देने लगती है। इनका लक्ष्य स्पष्ट है: शहरवासियों के जागने से पहले शहर को चकाचक कर देना।
2. चुनौतियों के बीच अटूट सेवा
सफाई कर्मियों का काम केवल झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं है। उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है:
* कठिन मौसम: चाहे कड़ाके की ठंड हो, मूसलाधार बारिश हो या झुलसा देने वाली गर्मी, इनका काम कभी नहीं रुकता।
* स्वास्थ्य जोखिम: धूल और कचरे के बीच काम करने से इन्हें श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है, फिर भी ये बिना किसी शिकायत के डटे रहते हैं।
* सड़कों पर सुरक्षा: सुबह के समय धुंध और अंधेरे में सड़कों पर काम करना जोखिम भरा होता है।
3. समाज की रीढ़
बरघाट की स्वच्छता का श्रेय केवल नगर पालिका की योजनाओं को नहीं, बल्कि इन कर्मठ हाथों को जाता है। यदि ये एक दिन भी काम पर न आएं, तो शहर की व्यवस्था चरमरा सकती है। इनके काम से न केवल शहर सुंदर दिखता है, बल्कि महामारियों और बीमारियों का खतरा भी कम होता है।
4. हमारा दायित्व (सुझाव)
एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, हम उनके काम को आसान बना सकते हैं:
* कचरा सही जगह डालें: सड़कों पर कचरा न फेंक कर हम उनके काम का सम्मान कर सकते हैं।
* सूखा और गीला कचरा अलग करें: इससे कचरा निपटान में उन्हें आसानी होती है।
* सम्मानजनक व्यवहार: एक मुस्कुराहट या 'धन्यवाद' उनके कठिन दिन को बेहतर बना सकता है।
> निष्कर्ष: > बरघाट के ये सफाई कर्मी केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि हमारे रक्षक हैं। उनकी मेहनत के दम पर ही हमें एक स्वस्थ वातावरण मिलता है। आइए, हम सब मिलकर उनके इस योगदान की सराहना करें।
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