आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को **देवशयनी एकादशी** या **हरिशयनी एकादशी** कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि इसी दिन से भगवान श्री हरि विष्णु चार महीनों के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं और **चातुर्मास** की शुरुआत होती है।
### व्रत का महत्व और नियम
* **शुभ कार्यों पर विराम:** भगवान विष्णु के शयन काल में जाने के कारण इन चार महीनों में विवाह, मुंडन और जनेऊ जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
* **आध्यात्मिक समय:** यह समय भक्ति, तप, साधना और आत्मनिरीक्षण के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
* **पूजा विधि:** इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, भगवान विष्णु की पीले फूलों, धूप, दीप और तुलसी दल से पूजा करें। रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन करना अत्यंत फलदायी होता है।
> **विशेष:** इस व्रत को करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, मानसिक शांति मिलती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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